टेराहर्ट्ज़ से किलोहर्ट्ज़: दो पायदान नीचे की लिपि
यह रूपांतरण क्या करता है
यह एक अरब से गुणा करता है, यानी उपसर्ग की सीढ़ी पर तीन पायदान एक साथ नीचे। नतीजा लंबा होना तय है, क्योंकि अकेले एक टेराहर्ट्ज़ में ही एक अरब किलोहर्ट्ज़ होते हैं। यह जोड़ी तब काम आती है जब स्रोत और संदर्भ दो अलग दुनिया से हों: आधुनिक माप टेराहर्ट्ज़ में छपती है, पर तीस-चालीस साल पुराने संग्रह और कुछ पुराने उपकरण किलोहर्ट्ज़ में आंकड़े रखते हैं, और तुलना के लिए किसी एक लिपि में आना पड़ता है।
संग्रह किस इकाई में बोलते हैं
स्पेक्ट्रोस्कोपी का साहित्य धीरे-धीरे ऊपर की इकाइयों में आया है: जो आंकड़े कभी तरंग संख्या या किलोहर्ट्ज़ में दर्ज होते थे, वे आज टेराहर्ट्ज़ में छपते हैं। एक ही पदार्थ की माप दो युगों के दस्तावेज़ों में अलग इकाइयों में मिलती है, और यह रूपांतरण उसी जोड़ी को जोड़ता है। अंकगणित सिर्फ़ नौ शून्य जोड़ता है, और यही उस इतिहास का पूरा पुल है।
टेराहर्ट्ज़ से किलोहर्ट्ज़: आणविक तालिका
प्रयोगशाला में नापी गई आणविक आवृत्तियाँ दोनों इकाइयों में, जहाँ किलोहर्ट्ज़ वाला स्तंभ बारह अंकों तक पहुँचकर लिखने की सीमा छू लेता है।
| टेराहर्ट्ज़ (THz) | किलोहर्ट्ज़ (kHz) |
|---|---|
| 1 | 1000000000 |
| 2 | 2000000000 |
| 10 | 10000000000 |
| 100 | 100000000000 |
| 300 | 300000000000 |
| 1000 | 1000000000000 |
दशमलव के बाद कहाँ तक
जब इनपुट में दशमलव हों तो नौ शून्य जोड़ना उन्हें पूर्ण संख्या में नहीं बदलता; वह भिन्न वैसे ही आगे चलती रहती है, बस उसका पूरा हिस्सा बहुत लंबा हो जाता है। इसीलिए स्पेक्ट्रम की तालिकाओं में दशमलव के बाद के अंक बहुतायत में दिखते हैं और उन्हें कभी गोल नहीं किया जाता: वही अंक बताते हैं कि माप किस उपकरण की सीमा तक गई थी।
नौ शून्य, और कुछ नहीं
टेराहर्ट्ज़ से किलोहर्ट्ज़ तक गुणक एक अरब है, इसलिए लिखा हुआ हर अंक वैसे ही रहता है और उसके पीछे नौ शून्य लग जाते हैं। 0.5 का मान इसी वजह से पूरा 500,000,000 बनता है, न कि छोटा कोई आंकड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टेराहर्ट्ज़ को किलोहर्ट्ज़ में कैसे बदलें?
एक अरब से गुणा कीजिए। इसलिए 1 THz यानी 1,000,000,000 kHz, और 0.5 THz यानी 500,000,000 kHz। यह तीन उपसर्ग-कदम हैं — किलो, मेगा, गीगा — जो मिलकर दस की नौवीं घात बनाते हैं।
एक टेराहर्ट्ज़ में कितने किलोहर्ट्ज़ होते हैं?
एक अरब। टेराहर्ट्ज़ और किलोहर्ट्ज़ के बीच मेगाहर्ट्ज़ तथा गीगाहर्ट्ज़ बैठते हैं, इसलिए किलोहर्ट्ज़ से टेराहर्ट्ज़ तक हज़ार के तीन कदम लगते हैं और गुणक एक अरब बनता है।
स्पेक्ट्रम संग्रह में इतनी बड़ी संख्याएँ क्यों दिखती हैं?
क्योंकि बीसवीं सदी के मध्य के ज़्यादातर स्पेक्ट्रम आंकड़े किलोहर्ट्ज़ और मेगाहर्ट्ज़ में दर्ज हुए और वे संग्रह आज भी उसी लिपि में पढ़े जाते हैं। ऊपर की इकाइयों में लिखने पर वही संख्याएँ छोटी हो जातीं, पर पुराना दस्तावेज़ अपनी इकाई बदलता नहीं।
क्या नतीजा गोल किया जाता है?
नहीं। दस की घात से गुणा सटीक होता है और दशमलव अंश जस का तस आगे चलता है, भले ही उसका पूरा हिस्सा लंबा हो जाए। इसीलिए कोई माप अपनी परिशुद्धता नहीं खोता और अंकों की गिनती से ही ग़लती पकड़ी जा सकती है।
क्या यह रूपांतरण तरंग संख्या के लिए भी काम आता है?
नहीं, तरंग संख्या प्रति सेंटीमीटर बताई जाती है और उसका रूपांतरण अलग गणना है। यह टूल सिर्फ़ आवृत्ति की इकाइयों के बीच चलता है, इसलिए तरंग संख्या वाले आंकड़े को पहले आवृत्ति में बदलना पड़ता है।